गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

गैर जिम्मेदार जवाब...!

छत्तीसगढ़ में मोतियाबिंद के आपरेशन के बाद आंखों की रोशनी गवांने के हर रोज नए मामले सामने आ रहे हैं। जिम्मेदारी से बचने के लिए हर कोई अलग-अलग कारण गिना रहा है। अब बालोद नेत्रकांड हादसे में डॉक्टरों ने नई वजह बतायी है। वे कह रहे हैं हमारे ऊपर गलत कार्रवाई की गई है। आपरेशन में गड़बड़ी तो लक्ष्य पूरा करने के चक्कर में हुई है। वे आरोप लगा रहे हैं, विभाग टारगेट तो देता है लेकिन इसके लिए पर्याप्त सुविधाएं मुहैय्या नहीं करवाता। बालौद में मरीजों का जहां आपरेशन हुआ वह जगह उपयुक्त नहीं थी। मौसम भी अनुकूल नहीं था। चिकित्सक तो आपरेशन में उपयोग किए गए उपकरणों और सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठा रहे हैं। इनका कहना है, कम से कम तीन प्रयोगशालाओं में उपकरणों का परीक्षण होना चाहिए। डॉक्टर जो भी कह रहे हैं, वह गलत नहीं है। सवाल यह है कि चिकित्सक जब अपनी हर सुख-सुविधा का ख्याल रखते हैं तो मरीजों की सुविधाओं की अनदेखी क्यों? अस्पतालों में काम के घंटे तय हैं। कभी ज्यादा काम करना पड़ा तो वे हो-हल्ला मचाते हैं। लेकिन, ज्यादा मरीजों की आंखों के आपरेशन का लक्ष्य मिला तो विरोध क्यों नहीं जताया? जब आपरेशन के लिए उपयुक्त मौसम और स्थान नहीं था तो आखिर आपरेशन क्यों किए गए? आम आदमी भी जानता है कि बारिश के मौसम में संक्रमण ज्यादा फैलता है। आपरेशन करने वाले तो डॉक्टर थे, आखिर फिर इन्होंने एहतियात क्यों नहीं बरता? कम दोषी तो आला अधिकारी भी नहीं हैं। स्वस्थ्य छत्तीसगढ़ की छवि के चक्कर में इन्होंने दर्जनों गरीबों के बदले रोशनी के बदले अंधेरा दे दिया। इसलिए लक्ष्य तय करते समय यह तो देखना चाहिए कि पर्याप्त सुविधाएं हैं कि नहीं, स्टॉफ है या नहीं। सरकार आए दिन परिवार नियोजन,टीवी उन्मूलन,तो कही कुष्ठ निवारण जैसे लक्ष्य तय करती रहती है। चिकित्सकों पर इन लक्ष्यों को पूरा करने का दबाव रहता है। लेकिन इसके लिए सरकार प्रोत्साहन राशि व अन्य सुविधाएं भी देती है। किसने कितना आपरेशन किया। इसका जिक्र डॉक्टर अपनी प्रोफाइल में भी करते हैं। और इसका लाभ भी लेते हैं। इसलिए जांच तो इस बात की भी होनी चाहिए कि कहीं प्रति आपरेशन मिलने वाली अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि की वजह से तो डॉक्टरों ने लापरवाही नहीं बरती। जब जांच चल ही रही तो सरकार को यह मानक भी तय कर देना चाहिए कि कौन डॉक्टर कितने समय में कितने आपरेशन कर सकता है। तभी लक्ष्यों को पूरा करने की सार्थकता सिद्व होगी। और स्वस्थ छत्तीसगढ़ का सपना भी साकार होगा।

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