रमन सरकार कहती है बिजली छत्तीसगढ़ की ताकत है। देश का यह इकलौता जीरो पावर कट राज्य है। बिजली उत्पादन और वितरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राज्य को पावर एक्सीलेंस एवार्ड मिला है। यहां सरप्लस बिजली थी, इसलिए सरकार बिजली बेचती थी। यह सारी बातें सही हैं। लेकिन, इन उपलब्धियों के बावजूद सचाई यह है कि इधर राज्यभर में अंधाधुंध बिजली कटौती हो रही है। शहरवासियों को बिजली की आंख मिचौनी के कारण पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। ग्रामीणों को बिजली मांगने पर लाठियां खानी पड़ रही हैं। उद्योगपति पावर कट से परेशान हैं। उनका व्यवसाय चौपट हो रहा है। सरप्लस बिजली वाले प्रदेश में बिजली कटौती होना और जनता को बिजली के लिए डंडे खाना सरकार के लिए शर्म की बात है। अपनी नाक बचाने के लिए सरकार अरबों रुपए की बिजली खरीद रही है। बिजली काट रही है। प्रदेश में 2744 मेगावॉट की मांग के अनुरूप मात्र 1930 मेगावॉट बिजली उपलब्ध है। मांग और आपूर्ति का यह गणित एक दिन में नहीं गड़बड़ाया। सरप्लस बिजली वाले राज्य की हालत धीरे-धीरे बिगड़ी है। पिछले साल सरकार ने जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु जैसे राज्यों से बिजली खरीदी थी। तब खराब मानसून को बहाना बनाया गया था। इस साल तो भरपूर बारिश हुई है। कोयले की मांग में भी कोई कमी नहीं आई है। आखिर फिर बिजली का संकट क्यों? दरअसल, बिजली संकट का बड़ा कारण छत्तीसगढ़ राज्य पावर जनरेशन कंपनी के संयंत्रों का आए दिन खराब हो जाना है। मौजूदा संकट इसी से उपजा है। एक नहीं पांच-पांच यूनिटें खराब पड़ी हैं। इससे विपक्ष के इस आरोप को बल मिल रहा है कि बिजली उपकरणों की खरीदी में बड़ा घोटाला हुआ है। संयत्रों में घटिया उपकरण खरीदकर लगाए गए हैं। इसी वजह से बिजली का उत्पादन आए दिन प्रभावित हो रहा है। आरोप तो यह भी लग रहे हैं कि बिजली अफसर निजी उत्पादकों को लाभ पहुंचाने के लिए और महंगी बिजली खरीदी में कमीशनखोरी के चक्कर में संयंत्रों के समुचित रखरखाव में लापरवाही बरत रहे हैं। यदि इन आरोपों में थोड़ी भी सचाई है तो यह बहुत ही गंभीर बात है। छत्तीसगढ़ के अफसरों पर वैसे ही भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हैं। इसलिए इन आरोपों की जांच होनी चाहिए। क्योंकि,अफसर कत्र्तव्यों के प्रति ईमानदार नहीं होगें तो चाहे जितने संयंत्र लगा लें बिजली की कमी दूर नहीं होगी राज्य में वर्तमान में १९२४ मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। दिसंबर २०१२ तक ३४२४ मेगावाट बिजली पैदा होगी। इतनी बिजली आत्मनिर्भरता के लिए पर्याप्त है। जरूरत है इसके समुचित उपयोग और सही ढंग से वितरण की। लेकिन, लगता है सरकार को सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाने की चिंता है। इसीलिए वह जांजगीर चांपा की ४०,००० एकड़ उपजाऊ जमीन को ३४ निजी बिजली कंपनियों को बेचकर ४०,००० मेगावाट बिजली पैदा करने का दिवास्वप्र दिखा रही है। हो सकता है इससे रमन सरकार के खाते में एक और रिकार्ड जुड़ जाए। लेकिन, इसके लिए भी किसानों को तो लाठियां खानी ही होंगी? उनके घर फिर भी उजियारा नहीं होगा। क्योंकि,अफसर तो वही रहेंगे ना।

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