गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

अच्छी पहल

स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टॉफ और मितानिनों को पुरस्कृत कर छत्तीसगढ़ सरकार ने अच्छी शुरुआत की है। इस नेक पहल से न केवल स्वास्थ्य विभाग के अन्य डॉक्टर और कर्मचारी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित होंगे बल्कि, राज्य के और विभागों में भी बेहतर कार्यशैली विकसित करने में मदद मिलेगी। खुशी की बात यह है कि मानव संसाधनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद हमारे चिकित्सकों और सरकारी अमले ने न केवल राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, बल्कि अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय कार्य किया। इससे यह बात साबित होती है कि यदि कार्य करने का जज्बा और जुनून हो तो कठिन से भी कठिन राह भी आसान हो जाती है। सीमित संसाधनों में भी राष्ट्रीय सूचकांकों की तुलना में छत्तीसगढ़ राज्य पुरुष और महिला नसबंदी, संपूर्ण टीकाकरण और स्तनपान आदि कार्यों में प्रशस्ति योग्य स्थिति में है तो इसका श्रेय उन कर्मचारियों और डॉक्टरों को जाता है, जिन्होंने संसाधनों का दुखड़ा रोए बिना सिर्फ और सिर्फ लक्ष्य पर नजर रखी। बहरहाल, जनसामान्य के स्वास्थ्य की बेहतरी और स्वास्थ्य सेवाओं को बहुआयामी स्वरूप देने के लिए अभी और सजगता व क्रियाशीलता की जरूरत है। इसके लिए प्रशासनिक कसावट के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को जनोन्मुखी बनाने के लिए सरकार को गंभीरता से सोचना होगा। स्वास्थ्य सूचकांक के मामले में अन्य राज्यों की तुलना में हम अभी बहुत पीछे हैं। राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों के ८६६ पद स्वीकृत हैं लेकिन, कार्यरत हैं २१५, चिकित्साधिकारियों के कुल २३६५ पदों के मुकाबले सिर्फ १०१४ ही भरे गए हैं। यही हाल नर्सिंग श्रेणी के पदों का है। यहां भी डेढ़ हजार से अधिक पद खाली हैं। ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का बुरा हाल है। दवाएं हैं तो डाक्टर नहीं, बेड है तो इन्हें रखने के लिए अस्पताल भवन नहीं। इन हालातों में महज उत्कृष्ट कर्मचारियों के भरोसे ही छत्तीसगढ़ देश में रोल मॉडल नहीं बन सकता है। इसके लिए सरकार को हर विभाग में उत्कृष्ट कार्य संस्कृति विकसित करनी होगी। संसाधन उपलब्ध कराने होंगे और योग्य कर्मचारियों को पुरस्कृत करने की परंपरा डालनी होगी। भ्रष्ट और बेईमान कर्मचारियों को दंड मिले इसकी भी ठोस व्यवस्था करनी होगी। दंड, सम्मान और पुरस्कार का यह सिलसिला जब हर विभाग में चल पड़ेगा तो विकास का कारवां खुद-ब-खुद आगे बढ़ता रहेगा। तब हमें रोल मॉडल बनने में देर न लगेगी।

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